कांस्टेबल को टक्कर मारने के मामले में आरोपी सबूतों के अभाव में बरी

कांस्टेबल को टक्कर मारने के मामले में आरोपी सबूतों के अभाव में बरी

Accused in the Case of Hitting a Constable

Accused in the Case of Hitting a Constable

चंडीगढ़, 1 फरवरी 2026: Accused in the Case of Hitting a Constable: जिला अदालत ने छह वर्ष पुराने एक सड़क हादसे के मामले में पुलिस कांस्टेबल को मोटरसाइकिल से टक्कर मारने के आरोप में गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। हालांकि अदालत ने आरोपी शंकर को बिना लाइसेंस और वैध कागजात के मोटरसाइकिल चलाने का दोषी मानते हुए मोटर व्हीकल एक्ट की धाराओं के तहत ₹1500 का जुर्माना लगाया है।

जानबूझकर नहीं मारी टक्कर : बचाव पक्ष

मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी ने जानबूझकर कांस्टेबल को टक्कर नहीं मारी। कांस्टेबल सतविंदर अचानक बाइक के सामने आ गया, जिससे हादसा हुआ। बचाव पक्ष ने ड्यूटी रोस्टर पेश कर यह भी दावा किया कि घटना स्थल पर कांस्टेबल की चेकिंग ड्यूटी निर्धारित नहीं थी।
इसके अलावा, घटना दोपहर करीब 1:30 बजे होने और एफआईआर शाम 5:49 बजे दर्ज किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए। पुलिस की ओर से अदालत में मेडिकल रिपोर्ट और गवाह पेश किए गए।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें और रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि आरोपी के खिलाफ सड़क हादसे से जुड़ी धाराओं में आरोप साबित नहीं हो पाए, जिसके चलते उसे बरी कर दिया गया।

क्या था मामला

पुलिस ने फरवरी 2019 में कांस्टेबल सतविंदर की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया था। शिकायत के अनुसार, कांस्टेबल सतविंदर हेड कांस्टेबल रामभज के साथ पंजाब यूनिवर्सिटी के गेट नंबर-3 के पास ड्यूटी पर तैनात था। इसी दौरान बिना हेलमेट पहने तेज रफ्तार से आ रहे दो युवक मोटरसाइकिल पर पहुंचे।
कांस्टेबल ने उन्हें रुकने का इशारा किया, लेकिन आरोप है कि बाइक चालक ने रुकने के बजाय कांस्टेबल को टक्कर मार दी। हादसे में कांस्टेबल को गंभीर चोटें आईं और उसके बाएं हाथ में फ्रैक्चर हो गया। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया था।